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vijay majoka posted an update: December 1, 2011 9:18 am · View
रोटी की जुगत में गांव खाली, स्कूल सूने
नरेश जैनत्न नौगांवा
शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद प्रत्येक बच्चे को शिक्षा दिलाने के लिए करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाएं जा रहे हैं, लेकिन गरीबी और बेरोजगारी इस पर भारी पड़ रही है। क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले दर्जनों गांव के ओड़ समाज के बच्चे पेट की आग बुझाने के लिए पढ़ाई छोडऩे को मजबूर हैं। ये बच्चे अपने परिवारों के साथ दो जून की रोटी की जुगाड़ में सैकड़ों किमी दूर अन्य राज्यों में चले जाते हैं। इससे इनकी पढ़ाई खासी प्रभावित होती है। बच्चों के परिजन पंजाब व गुजरात में कपास बीनने एवं धान लगाने जैसे कार्यों से जीविकोपार्जन करते हैं।
कस्बे के अंतर्गत हाजीपुर, नंगलीवाल, डाबरी, बरामदा, मेघाबास, नीकच, शेरपुर आदि गांव हैं। इसमें अधिकांश संख्या में ओढ़ राजपूत परिवार के लोग रहते हैं। इनके लिए यहां रहकर दो जून की रोटी की जुगाड़ करना भी इनके लिए मुश्किल होता है। इसलिए ये परिवार प्रत्येक वर्ष रोटी की जुगाड़ में सैकड़ों किमी दूर गुजरात और पंजाब जाते हैं। सबसे अहम् बात यह है कि इनके बच्चे यहां सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं, लेकिन परिवार के जाने के कारण ये बच्चे भी साथ चले जाते हैं। इसके चलते जहां इन बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है और ये शिक्षा की मुख्यधारा में जुडऩे से वंचित रह जाते हैं। वर्तमान स्थिति में विद्यालयों में नामांकन संख्या से 50 फीसदी ही बच्चे अध्ययनरत हैं। ग्रामीण राकेश कुमार ने बताया कि यहां रोजगार न होने के कारण अन्य राज्यों में जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। मजबूरन बच्चों को भी साथ ले जाना पड़ता है, जिससे इनकी पढ़ाई भी प्रभावित होती है।
॥ओड़ राजपूत परिवारों के साथ बच्चों के जाने के कारण कई विद्यालयों में उपस्थिति आधी रह गई है। इन बच्चों के वापस लौटने पर अतिरिक्त कक्षाएं संचालित कर कोर्स पूरा कराया जाता है।ञ्जञ्ज रघुवीर सिंह चौहान, बीईईओ रामगढ़
पलायन
नौगांवा क्षेत्र के ओड़ राजपूत परिवारों के साथ अन्य राज्यों को पलायन करने को मजबूर हैं बच्चे
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